Sunday, 22 September 2013

समझो इशारे part 2

........स्ट्रेस टेस्ट दिल की बीमारी का पता लगाने के लिए स्ट्रेस टेस्ट किया जा सकता है। इसे डॉक्टर या प्रशिक्षित तकनीशियन यह पता लगाने के लिए करते हैं कि हार्ट किस स्तर तक दबाव सह सकता है। आमतौर पर किया जाने वाला स्ट्रेस टेस्ट है एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट। एक्सरसाइज
स्ट्रेस टेस्ट : एक्सरसाइज इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, टे्रडमिल टेस्ट, ग्रेडेड एक्सरसाइज टेस्ट या स्ट्रेस ईसीजी यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि मरीज का दिल मेहनत करने पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। इसके लिए ट्रेडमिल पर चलने या साइकल पर पेडल चलाने के लिए कहा जाता है, जिसका कठिनाई स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है और इस दौरान इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर की निगरानी की जाती है। कार्डिएक स्ट्रेस टेस्ट के कुछ साइड इफेक्ट भी हैं। इनमें पल्पिटेशन, सांस का जल्दी-जल्दी आना और छाती में दर्द आदि शामिल हैं। कुछ बिरले मामलों में कार्डिएक स्टे्रस टेस्ट में दी जाने वाली दवाओं से मामूली रूप से ब्लड प्रेशर बढऩे जैसे साइड इफेक्ट देखे जाते हैं। ईकोकार्डियोग्राम इसमें हार्ट की मांसपेशियों, हार्ट वाल्व की स्थिति के और दिल की बीमारियों के खतरे के आकलन के लिए अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जाता है। कार्डिएक कैथेटराइजेशन इसे कार्डिएक कैथ या कोरोनरी एंजियोग्राम भी कहते हैं। यह एक इनवेसिव इमेजिंग प्रक्रिया है जिसके जरिये डॉक्टर हार्ट की फंक्शनिंग के बारे में पता लगाते हैं। टेस्ट के दौरान, एक लंबी, पलती ट्यूब जिसे कैथेटर कहते हैं, मरीज के हाथ और पैर की एक रक्त नलिका में डाली जाती है और एक खास एक्सरे मशीन की मदद से हार्ट की स्थिति का पता लगाया जाता है। इसमें कैथेटर के जरिये एक कंट्रास्ट डाई अंदर ले जाई जाती है ताकि मरीज के वाल्व, कोरोनरी आर्टरी और हार्ट चैंबर के एक्सरे और विडियो बनाए जा सकें। इस प्रक्रिया के कुछ खतरे भी हैं: - ब्लीडिंग - कैथेटर जिस जगह लगाया जाता है, वहां की आर्टरी में डैमेज हो सकता है, जिससे बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। -डाई या दवाओं से होना वाली अलर्जिक रिएक्शन। -किडनी डैमेज। इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी टेस्ट इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी टेस्ट (ईपी) स्टडी एक ऐसा टेस्ट है जो दिल की इलेक्ट्रिकल ऐक्टिविटी और इलेक्ट्रिकल पाथवे की जांच करता है। यह टेस्ट दिल की धड़कनों में आई अनियमितता की वजह पता लगाने में मददगार होता है। ईपी स्टडी के दौरान डॉक्टर सुरक्षित तरीके से असामान्य हार्ट रिद्म की प्रतिलिपि बनाता है और इसके बाद मरीज को अलग-अलग तरह की दवाएं दे सकता है। इससे डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि कौन सी दवा बेहतर नियंत्रण में कारगर है या कौन सी प्रक्रिया या डिवाइस असामान्य धड़कनों के इलाज के लिए बेहतर होगी। सीटी हार्ट स्कैन कार्डिएक सीटी एक हार्ट-इमेजिंग टेस्ट है। इसमें सीटी तकनीक इंट्रावीनस, कंट्रास्ट यानी डाई के इस्तेमाल के साथ या बिना इनके इस्तेमाल के दिल की संरचना, कोरोनरी सर्कुलेशन और रक्त नलिकाओं (इनमें एओट्रा, पल्मनरी वेंस और आर्टरी शामिल हैं) की स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है। मायोकार्डियल बायॉप्सी दिल की बीमारियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली इनवेसिव प्रक्रिया है। इसमें एक छोटे कैथेटर का इस्तेमाल होता है जिसके सिरे पर पकडऩे वाला डिवाइस लगा होता है। इसमें हार्ट की मसल टिश्यू का छोटा हिस्सा लिया जाता है और उसे अनालिसिस के लिए लैब में भेजा जाता है। हार्ट एमआरआई डॉक्टर मरीज के चेस्ट, हार्ट, फेफड़ों, मुख्य नलिकाओं और हार्ट की बाहरी लाइनिंग के ढांचे और फंक्शन के आकलन के लिए एमआरआई का इस्तेमाल करते हैं। इसका इस्तेमाल कोरोनरी आर्टरी डिजीज, पेरिकार्डियल डिजीज, कार्डिएक ट्यूमर, हार्ट वाल्व डिजीज, हार्ट मसल डिजीज जिसे कार्डियोमायोपैथी कहते हैं और जन्मजात दिल की बीमारी की मौजूदगी का पता लगाने के लिए भी किया जाता है। कार्डिएक एमआरआई में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेटिक फील्ड और रेडियोधर्मी तरंगों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। पेरीकार्डियोसेंटेसिस इसे पेरीकार्डियल टैप भी कहते हैं। यह एक इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें एक निडल और कैथेटर के जरिये हार्ट के आस-पास जमा तरल को हटाया जाता है। इस तरल की जांचकर हार्ट में इन्फेक्शन जैसे पेरीकार्डिटिस, कंजेस्टिव हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक का पता लगाया जाता है। जांच और उन पर आने वाला खर्च जांच खर्च ईकेजी 150-200 रुपये ब्लड टेस्ट 1200 रुपये न्यूक्लियर स्कैन 10,000 रुपये कोरोनरी एंजियोग्राफी 12000 रुपये और ज्यादा जानकारी ऐप Coronary Heart Disease ओएस : एंड्रॉयड कीमत : फ्री किसी इंसान को कोरोनरी हार्ट डिजीज होने का कितना खतरा हो सकता है, इस ऐप की मदद से यह जाना जा सकता है। फ्री ऐप है। Instant Heart Rate ओएस : एंड्रॉयड कीमत : फ्री हार्ट रेट का आकलन करने और उस पर नजर रखने के लिए यह बहुत अच्छा ऐप है यानी स्मार्टफोन की मदद से ही आप अपने दिल की धड़कनों पर नजर रख सकते हैं। वेबसाइट दिल की बीमारियों के लिए काम आने वाले टेस्टों के बारे में जानकारी चाहिए तो इन वेबसाइट्स पर जा सकते हैं। tinyurl.com/ljt5pra tinyurl.com/lw7puc9 यूट्यूब विडियो स्ट्रेस टेस्ट क्या होता है? ईकेजी कैसे किया जाता है? ऐसी ही बातों को आप इस विडियो के जरिये जान सकते हैं : http://www.youtube.com/watch?v=yqA2L6kLLmg 10 बातें जो दिल को रखेंगी स्वस्थ 1. सेहतमंद डाइट दिल की सेहत बनाए रखने के लिए अपने खानपान का खास खयाल रखें। आप क्या खा रहे हैं और कब खा रहे हैं, दोनों ही बातें महत्वपूर्ण हैं। सब्जियां, फल, साबुत अनाज और बहुत थोड़ी मात्रा में तेल, ये ऐसी चीजें हें जिन्हें रोजाना के खानपान का हिस्सा बनाने से दिल की सेहत अच्छी बनी रह सकती है। 2. वजन काबू में मोटापा तमाम तरह की दिल की बीमारियों, ब्लडप्रेशर और डायबीटीज का खतरा बढ़ाता है इसलिए वजन को काबू में रखना बेहद जरूरी है। अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज और खानपान का ध्यान रखकर मोटापे को काबू में रखा जा सकता है। बॉडी मास इंडेक्स 20 से 25 के बीच रखना जरूरी है। 3. योग और एक्सरसाइज रोजाना 30 मिनट की ऐरोबिक एक्सरसाइज दिल की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है। रोजाना किया गया योग और मेडिटेशन तनाव को कम करने में सहायक है और अगर तनाव कम होगा, तो दिल का सामान्य स्वास्थ्य ठीक बना रहेगा। एक्सरसाइज, योग या मेडिटेशन सभी नहीं कर पाएं तो किसी एक का नियमित अभ्यास जरूर करें। 4. सक्रिय रहें अगर योग और एक्सरसाइज के लिए आप नियमित रूप से वक्त नहीं निकाल पा रहे हैं तो खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखें। लिफ्ट की बजाय सीढिय़ों का प्रयोग करें, गाड़ी दूर पार्क करके ऑफिस तक पैदल आएं। खुद को सक्रिय रखने के लिए ऐसे ही छोटे-छोटे कई दूसरे काम किए जा सकते हैं। 5. तनाव को बाय तनाव तमाम बीमारियों की जड़ है। दिल की बीमारियां भी इनमें शामिल हैं। जिंदगी में कई बार ऐसे पल आते हैं, जब जबर्दस्त तनाव होता है, लेकिन इन पलों को ज्यादा लंबे समय तक न खिंचने दें। तनाव से निजात पाने के लिए दोस्तों से मिलें, सामाजिक बनें, स्थितियों को स्वीकारें, काम से छोटा ब्रेक लें। 6. स्मोकिंग और अल्कोहल छोड़ें जरूरत से ज्यादा शराब पीने से ट्राइग्लिसरॉइड्स बढ़ सकते हैं। ट्राइग्लिसरॉइड्स खून में फैट की मात्रा होती है। ज्यादा अल्कोहल मोटापा, हार्ट फेलियर और हाई बीपी की वजह भी बन सकती है। इसी तरह धूम्रपान भी दिल के रोगों के लिए जिम्मेवार है। अल्कोहल और सिगरेट से परहेज करें और लेनी ही है तो बेहद कम मात्रा में लें। 7. अच्छी नींद लें नींद की कमी से ब्लडप्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल पर असर पड़ता है। नींद की कमी से तनाव में भी बढ़ोतरी होती है, जो कि दिल के रोगों के होने का अपने आप में कारण है। हालांकि नींद की जरूरत हर इंसान की अलग अलग हो सकती है, फिर भी मोटे तौर पर 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है। 8. खुलकर हंसें, मस्त रहें जो लोग खुलकर ठहाके लगाकर हंसते हैं, उन्हें दिल की बीमारियां कम होती है। ज्यादा हंसने वालों का रक्त प्रवाह अच्छा बना रहता है और आर्टरीज को कठोर होने से रोकता है। दिल का स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने के लिए ठहाकेदार हंसी और हमेशा खुश रहना एक अचूक नुस्खा माना जाता है। 9. फैमिली हिस्ट्री का ध्यान अगर आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी रही है तो आपको ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। आप अपने जींस को तो नहीं बदल सकते, लेकिन थोड़ा अलर्ट रहकर बीमारी को टाल जरूर सकते हैं। अपने डॉक्टर को फैमिली हिस्ट्री के बारे में बताएं और उनकी सलाह के मुताबिक लाइफस्टाइल में बदलाव करें। 10. डॉक्टर के पास जाएं कई बार लोग सीने में दर्द, चक्कर आना या ऐसी ही दूसरी स्थितियों में लोग आमतौर पर डॉक्टर के पास नहीं जाते। कई बार लंबे समय तक यह पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें दिल की बीमारी हो रही है। ऐसे में बेहतर यह है कि ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल लेवल पर नजर रखी जाए।

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