अगर दिल के मरीज
हैं तो...
- डॉक्टर की सलाह से ही एक्सरसाइज करें। डॉक्टर यह जांच करता है कि कोई मरीज कितना स्ट्रेस बर्दाश्त कर सकता है। उसी हिसाब से एक्सरसाइज चार्ट बनाया जाता है।
- रोजाना वॉक जरूर करें। लेकिन रफ्तार इतनी ही रखें, जिसमें आराम महसूस करते हों और सांस ज्यादा न फूले।
- सुबह-शाम खाली पेट सैर करें। बीमारों को खाने के दो घंटे बाद सैर करनी चाहिए।
- एक्सरसाइज के बाद 15-20 मिनट आराम जरूर करें।
- वेटलिफ्टिंग ज्यादा न करें
3. लाइफस्टाइल
- तंबाकू का सेवन किसी रूप में न करें। स्मोकिंग छोड़ने से दिल की बीमारी का खतरा 30-50 फीसदी तक कम हो जाता है। स्मोकिंग से दिल की आर्टरीज में दरारें पड़ जाती हैं, जो कभी भी ब्लॉकेज की वजह बन सकती हैं।
- फास्ट फूड मसलन, मैगी, नूडल्स, बर्गर, पित्जा, पास्ता, कोला, समोसा, टिक्की आदि जंक फूड से बचें।
- पैदल चलें और कसरत करें।
- हर वक्त दबाव व तनाव में रहने से बचें।
- लिफ्ट की बजाय सीढि़यों का इस्तेमाल करें।
- गाड़ी को ऑफिस से एकाध किलोमीटर दूर पार्क करें और उस फासले को पैदल पूरा करें।
- जितना हो सके, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करें क्योंकि उसमें पैदल चलना पड़ता है।
- सीट पर बैठकर कैंटीन या किसी सहयोगी को फोन कर बुलाने की बजाय चलकर वहां तक जाएं।
4. तनाव को बाय
- रोजाना आधा घंटा योगासन करें। इसमें आसन, ध्यान, गहरी सांस और अनुलोम-विलोम को शामिल करें।
- सुबह-शाम मेडिटेशन करें। दोनों वक्त मुमकिन नहीं है तो किसी एक वक्त ध्यान जरूर लगाएं। इसके लिए शांत जगह पर बैठकर मंत्रोच्चारण करें या आंखें बंद करके आती-जाती सांसों पर ध्यान दें। इससे शरीर में ऑक्सिजन की मात्रा बढ़ती है।
- डीप ब्रिदिंग यानी गहरे सांस लेना-छोड़ना और अनुलोम-विलोम करें। इनसे रिस्क फैक्टर कम होते हैं।
- शवासन में लेटकर कायोत्सर्ग नामक ध्यान करें। इसमें आंखें बंद करके पूरे शरीर के अंगों को महसूस करें। शवासन से मांसपेशियों का तनाव कम होता है।
- अगर दिल के मरीज हैं तो ऊपर लिखी गई सभी क्रियाओं को कर सकते हैं। बस सांस बहुत देर तक न रोकें।
कुछ और तरीके
तनाव कम करने के कई तरीके हो सकते हैं, जिन्हें सेहतमंद और बीमार, सभी आजमा सकते हैं :
- किसी हॉबी के लिए वक्त निकालें, जैसे कि पेंटिंग, फोटॉग्रफी, गाना सुनना, खेलना, किताबें पढ़ना आदि।
- बच्चों और पालतू जानवरों के साथ खेलें।
- जब भी मुमकिन हो, घूमने जाएं। नई-नई जगहें मन को रिलैक्स करती हैं।
- कॉम्पिटिशन की अंधी दौड़ से बचने कोशिश करें। जो हो रहा है, उसे स्वीकार करें।
- अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें। ध्यान से भावनाओं का नेगेटिव असर कम होकर पॉजिटिव असर बढ़ जाता है।
- परफेक्शनिस्ट होने की कोशिश न करें। यह तनाव पैदा करता है।
- अपने काम को थोड़ा-थोड़ा करें। एक साथ बहुत सारा काम सिर पर न लें।
10 गलतियां जो दिल पर पड़ती हैं भारी:
1. ब्रेकफ़स्ट छोड़ना
ज्यादातर लोग मोटापे के डर से ब्रेकफ़स्ट नहीं करते। सच यह है कि ब्रेकफ़स्ट करने वाले, न करने वालों की तुलना में पतले होते हैं। नाश्ते में किसी भी रूप में प्रोटीन, दही और बेरी, ग्रिल की हुई मछली, एक ऑमलेट या सूखे मेवा खाने वाले लोग ज्यादा पतले होते हैं।
2. वीकेंड पर ट्रीट
माना जाता है कि पूरे हफ्ते हेल्दी खाना खाने के बाद वीकेंड पर खुद को ट्रीट देनी चाहिए। इससे आपका मोटापा बढ़ सकता है। वीकेंड पर खुद को ट्रीट देने के लिए सप्ताह के बाकी दिन अतिरिक्त एक्सरसाइज करें। वीकेंड पर एक साथ फैटी चीजों की बजाय एक चीज लें।
3. अरे ये तो हेल्दी है!
लोग यह कहते हुए ज्यादा खा लेते है कि अरे ये तो हेल्दी है। यह सोच आपके फिटनेस रिजीम को फेल कर सकती है। मसलन पिस्ता या मूंगफली हेल्दी हैं, लेकिन इनमें कैलरी ज्यादा होती है। ऐसे में जिन्हें ओवरईटिंग की आदत है, उन्हें ये पतला नहीं होने देंगी।
4. टीवी के सामने खाना
ज्यादातर लोग टीवी के सामने बैठकर खाते हैं। यह अच्छी आदत नहीं है, क्योंकि इससे ध्यान बंटता है और व्यक्ति को यह क्लू नहीं मिल पाता है कि कब उसके खाने का कोटा पूरा हो गया। ऐसी आदत है तो अपने पास उतनी ही चीज रखें जितनी आपको खानी चाहिए।
5. डिनर हो सबसे खास
भारतीय घरों में डिनर सबसे बड़ा मील होता है। करना यह चाहिए कि दोपहर में हल्का-फुल्का खाना लें और रात में सोने से दो घंटे पहले लो कैलरी वाली डाइट जैसे सब्जियां, फ्रूट सलाद, जूस या दूध लें।
6. डिनर के बाद फौरन सोना
सोने से ठीक पहले खाना सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसा करने वालों के शरीर में कैलरी बर्न नहीं हो पाती, जिसे बॉडी लॉक कहते हैं। ऐसे में मोटापा तेजी से बढ़ता है। रात में शरीर आराम में आ जाता है और कैलरी बर्न होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
7. ईटिंग फैमिली स्टाइल
आमतौर पर लोग डाइनिंग टेबल पर बड़े सविंर्ग बाउल में खाना सर्व करते हैं और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से उसमें से प्लेट में लेते हैं। इसके बजाय परंपरागत फैमिली स्टाइल डिनर परोसना बेहतर है, जिसमें सबकी प्लेट में नियंत्रित मात्रा में सारी चीजें परोस दी जाती हैं।
8. टेबल पर नमक रखना
मोटापा बढ़ाने में नमक की भी भूमिका होती है। टेबल पर नमक रखने की आदत आपके डाइट रिजीम को प्रभावित कर सकती है। नमक हाई ब्लड प्रेशर और खाने के स्वाद की वजह बनता है। इससे बचने के लिए नमक को खाने की टेबल से दूर रखें।
9. तेल का दोबारा इस्तेमाल
भारतीय घरों में तेल के दोबारा इस्तेमाल की आदत बेहद आम है। यह आदत सेहत के लिए खराब है। कितना भी अच्छा तेल क्यों न हो, एक बार इस्तेमाल के बाद वह खाने योग्य नहीं बचता। उसे इस्तेमाल न करें।
10. खाने के बाद टहलना
आम भारतीय घरों में खाना खाने के बाद ईवनिंग वॉक पर जाने की आदत आम है। डॉक्टरों के मुताबिक, कोई भी एक्सरसाइज, वॉकिंग, जॉगिंग खाने से पहले करना ही बेहतर है। खाने के चार घंटे बाद तक ऐसा नहीं करना चाहिए।
एक्सर्पट्स पैनल
डॉ. समीर श्रीवास्तव, डायरेक्टर (काडिर्यॉलजी), फोटिर्स एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट
डॉ. आर. एन. कालरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, कालरा हॉस्पिटल
डॉ. एल. के झा, इंदप्रस्थ अपोलो हॉस्टिल
डॉ. ऋषि गुप्ता, एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज
फेसबुक पर Like करने के लिए यहां क्लिक करें
ट्विटर पर Follow करने के लिए यहां क्लिक करें
खुद संभालें सेहत
अगर वजन नॉर्मल है, कमर का घेरा महिलाओं में 32 इंच और पुरुषों में 36 इंच या इससे कम है, बीएमआई 23 तक हो, सिगरेट और अल्कोहल नहीं लेते हों, खानपान ठीक हो, तनाव कम से कम हो और रेग्युलर एक्सरसाइज करते हों तो आपको दिल की बीमारी होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
अचानक दर्द उठे तो...
अगर छाती में अचानक दर्द हो, पसीना आए और घबराहट हो तो हार्ट अटैक का दर्द हो सकता है। हालांकि कई बार गैस दर्द में भी यही लक्षण होते हैं। सबसे पहले मरीज के कपड़े ढीले कर दें। उसे ज्यादा चलाएं-फिराएं नहीं। खुद धीरज न खोएं। अगर पहले से दिल के मरीज हैं तो एक गोली सॉरबिट्रेट (5 मिग्रा.) की दें। एस्पिरिन (ब्रैंड नेम डिस्प्रन आदि) भी ले सकते हैं। 300 मिग्रा एस्पिरिन की गोली चबा लेने से जान जाने का जोखिम नहीं रहता। अगर नहीं जानते कि दिल का दर्द है या कुछ और, तो भी ये गोली दे सकते हैं। अल्सर है तो एस्पिरिन न दें, फौरन डॉक्टर के पास जाएं।
दिल की बीमारी और गैस
सीने में दर्द होने पर अक्सर यह कन्फ़्यूज़न रहता है कि इसके पीछे गैस जिम्मेदार है या कोई दिल की बीमारी हो गई है। एक्सर्पट्स का कहना है कि इस तरह के कन्फ़्यूज़न में कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। ऐसे में अगर किसी को पता है कि उसे हार्ट की बीमारी है तो वह एस्पिरिन की गोली अपने पास रखे। सीने में दर्द होने पर जुबान के नीचे एस्पिरिन की गोली रखें, लेकिन जिन्हें नहीं पता है, वे इसे अपनी मर्जी से बिल्कुल न लें क्योंकि इससे उनका ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है।
सीने में दर्द के मामले में कुछ लक्षणों पर गौर करें, मसलन अगर एग्जर्शन की वजह से दर्द हो रहा है तो इसके दिल से संबंधित होने के चांस ज्यादा हैं। आराम करते समय होने वाला सीने का दर्द जो कुछ सेकंड में गायब हो जाता है, वह एसिडिक हो सकता है, लेकिन यह ध्यान रखें कि आराम के समय होने वाला सीने का दर्द भी अगर जबड़े और बायीं बांह तक पहुंच रहा है तो यह हार्ट से संबंधित है। लक्षणों को लेकर जरा सा भी कन्फ़्यूज़न हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और ईसीजी टेस्ट कराकर सही वजह का पता लगाएं।
सेक्सुअल लाइफ पर असर
दिल की बीमारी से पीडि़त लोगों के दिमाग में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या अब वह पहले की तरह अपने जीवनसाथी के साथ अंतरंग संबंध बना सकेंगे। एक्सर्पट्स का मानना है कि सावधानी न बरतने पर ऐसा करना जानलेवा भी हो सकता है। इसके कई उदाहरण सामने आए हैं। अगर व्यक्ति को पहले से दिल की बीमारी है और उसका इलाज नहीं हुआ है, तो बेहतर है कि वह संबंध बनाने से बचे।
अगर बीमारी का इलाज हो चुका है तो वह सामान्य जिंदगी जी सकता है, लेकिन इससे पहले यह जरूर देख लें कि आप ऐसा करने के लिए फिट हैं या नहीं। इसके लिए एक ट्रेडमिल टेस्ट होता है। अगर कोई 5 मिनट से अधिक समय ट्रेडमिल टेस्ट बिना सांस उखड़े या बिना दर्द के कर सकता है तो वह फिट है। मगर ऐसे लोगों को वायग्रा जैसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए, खासतौर से तब जब वे नाइट्रेट की कैटिगरी की कोई दवा ले रहे हों क्योंकि सिल्डेनालिल कैटिगरी की दवा लेने से दिल के कई मरीजों की सेक्स करते वक्त अचानक हुए हार्ट अटैक से मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह लें।
हार्ट अटैक आने या हार्ट संबंधी बीमारी के इलाज के बाद पहले दो हफ्ते तक सेक्स करने से परहेज बताया जाता है। इसके बाद ट्रेडमिल टेस्ट पास करने वाले को सामान्य ऐक्टिविटी की इजाजत दी जाती है। इसके बाद भी सेक्स के दौरान अगर सीने में दर्द या प्रेशर महसूस हो, थकान, बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, पल्स तेज होने या सिर चकराने जैसे लक्षण दिखें तो समझ जाएं कि आपके दिल को कठिनाई हो रही है। अपने डॉक्टर से सलाह लें।
- डॉक्टर की सलाह से ही एक्सरसाइज करें। डॉक्टर यह जांच करता है कि कोई मरीज कितना स्ट्रेस बर्दाश्त कर सकता है। उसी हिसाब से एक्सरसाइज चार्ट बनाया जाता है।
- रोजाना वॉक जरूर करें। लेकिन रफ्तार इतनी ही रखें, जिसमें आराम महसूस करते हों और सांस ज्यादा न फूले।
- सुबह-शाम खाली पेट सैर करें। बीमारों को खाने के दो घंटे बाद सैर करनी चाहिए।
- एक्सरसाइज के बाद 15-20 मिनट आराम जरूर करें।
- वेटलिफ्टिंग ज्यादा न करें
3. लाइफस्टाइल
- तंबाकू का सेवन किसी रूप में न करें। स्मोकिंग छोड़ने से दिल की बीमारी का खतरा 30-50 फीसदी तक कम हो जाता है। स्मोकिंग से दिल की आर्टरीज में दरारें पड़ जाती हैं, जो कभी भी ब्लॉकेज की वजह बन सकती हैं।
- फास्ट फूड मसलन, मैगी, नूडल्स, बर्गर, पित्जा, पास्ता, कोला, समोसा, टिक्की आदि जंक फूड से बचें।
- पैदल चलें और कसरत करें।
- हर वक्त दबाव व तनाव में रहने से बचें।
- लिफ्ट की बजाय सीढि़यों का इस्तेमाल करें।
- गाड़ी को ऑफिस से एकाध किलोमीटर दूर पार्क करें और उस फासले को पैदल पूरा करें।
- जितना हो सके, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करें क्योंकि उसमें पैदल चलना पड़ता है।
- सीट पर बैठकर कैंटीन या किसी सहयोगी को फोन कर बुलाने की बजाय चलकर वहां तक जाएं।
4. तनाव को बाय
- रोजाना आधा घंटा योगासन करें। इसमें आसन, ध्यान, गहरी सांस और अनुलोम-विलोम को शामिल करें।
- सुबह-शाम मेडिटेशन करें। दोनों वक्त मुमकिन नहीं है तो किसी एक वक्त ध्यान जरूर लगाएं। इसके लिए शांत जगह पर बैठकर मंत्रोच्चारण करें या आंखें बंद करके आती-जाती सांसों पर ध्यान दें। इससे शरीर में ऑक्सिजन की मात्रा बढ़ती है।
- डीप ब्रिदिंग यानी गहरे सांस लेना-छोड़ना और अनुलोम-विलोम करें। इनसे रिस्क फैक्टर कम होते हैं।
- शवासन में लेटकर कायोत्सर्ग नामक ध्यान करें। इसमें आंखें बंद करके पूरे शरीर के अंगों को महसूस करें। शवासन से मांसपेशियों का तनाव कम होता है।
- अगर दिल के मरीज हैं तो ऊपर लिखी गई सभी क्रियाओं को कर सकते हैं। बस सांस बहुत देर तक न रोकें।
कुछ और तरीके
तनाव कम करने के कई तरीके हो सकते हैं, जिन्हें सेहतमंद और बीमार, सभी आजमा सकते हैं :
- किसी हॉबी के लिए वक्त निकालें, जैसे कि पेंटिंग, फोटॉग्रफी, गाना सुनना, खेलना, किताबें पढ़ना आदि।
- बच्चों और पालतू जानवरों के साथ खेलें।
- जब भी मुमकिन हो, घूमने जाएं। नई-नई जगहें मन को रिलैक्स करती हैं।
- कॉम्पिटिशन की अंधी दौड़ से बचने कोशिश करें। जो हो रहा है, उसे स्वीकार करें।
- अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें। ध्यान से भावनाओं का नेगेटिव असर कम होकर पॉजिटिव असर बढ़ जाता है।
- परफेक्शनिस्ट होने की कोशिश न करें। यह तनाव पैदा करता है।
- अपने काम को थोड़ा-थोड़ा करें। एक साथ बहुत सारा काम सिर पर न लें।
10 गलतियां जो दिल पर पड़ती हैं भारी:
1. ब्रेकफ़स्ट छोड़ना
ज्यादातर लोग मोटापे के डर से ब्रेकफ़स्ट नहीं करते। सच यह है कि ब्रेकफ़स्ट करने वाले, न करने वालों की तुलना में पतले होते हैं। नाश्ते में किसी भी रूप में प्रोटीन, दही और बेरी, ग्रिल की हुई मछली, एक ऑमलेट या सूखे मेवा खाने वाले लोग ज्यादा पतले होते हैं।
2. वीकेंड पर ट्रीट
माना जाता है कि पूरे हफ्ते हेल्दी खाना खाने के बाद वीकेंड पर खुद को ट्रीट देनी चाहिए। इससे आपका मोटापा बढ़ सकता है। वीकेंड पर खुद को ट्रीट देने के लिए सप्ताह के बाकी दिन अतिरिक्त एक्सरसाइज करें। वीकेंड पर एक साथ फैटी चीजों की बजाय एक चीज लें।
3. अरे ये तो हेल्दी है!
लोग यह कहते हुए ज्यादा खा लेते है कि अरे ये तो हेल्दी है। यह सोच आपके फिटनेस रिजीम को फेल कर सकती है। मसलन पिस्ता या मूंगफली हेल्दी हैं, लेकिन इनमें कैलरी ज्यादा होती है। ऐसे में जिन्हें ओवरईटिंग की आदत है, उन्हें ये पतला नहीं होने देंगी।
4. टीवी के सामने खाना
ज्यादातर लोग टीवी के सामने बैठकर खाते हैं। यह अच्छी आदत नहीं है, क्योंकि इससे ध्यान बंटता है और व्यक्ति को यह क्लू नहीं मिल पाता है कि कब उसके खाने का कोटा पूरा हो गया। ऐसी आदत है तो अपने पास उतनी ही चीज रखें जितनी आपको खानी चाहिए।
5. डिनर हो सबसे खास
भारतीय घरों में डिनर सबसे बड़ा मील होता है। करना यह चाहिए कि दोपहर में हल्का-फुल्का खाना लें और रात में सोने से दो घंटे पहले लो कैलरी वाली डाइट जैसे सब्जियां, फ्रूट सलाद, जूस या दूध लें।
6. डिनर के बाद फौरन सोना
सोने से ठीक पहले खाना सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसा करने वालों के शरीर में कैलरी बर्न नहीं हो पाती, जिसे बॉडी लॉक कहते हैं। ऐसे में मोटापा तेजी से बढ़ता है। रात में शरीर आराम में आ जाता है और कैलरी बर्न होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
7. ईटिंग फैमिली स्टाइल
आमतौर पर लोग डाइनिंग टेबल पर बड़े सविंर्ग बाउल में खाना सर्व करते हैं और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से उसमें से प्लेट में लेते हैं। इसके बजाय परंपरागत फैमिली स्टाइल डिनर परोसना बेहतर है, जिसमें सबकी प्लेट में नियंत्रित मात्रा में सारी चीजें परोस दी जाती हैं।
8. टेबल पर नमक रखना
मोटापा बढ़ाने में नमक की भी भूमिका होती है। टेबल पर नमक रखने की आदत आपके डाइट रिजीम को प्रभावित कर सकती है। नमक हाई ब्लड प्रेशर और खाने के स्वाद की वजह बनता है। इससे बचने के लिए नमक को खाने की टेबल से दूर रखें।
9. तेल का दोबारा इस्तेमाल
भारतीय घरों में तेल के दोबारा इस्तेमाल की आदत बेहद आम है। यह आदत सेहत के लिए खराब है। कितना भी अच्छा तेल क्यों न हो, एक बार इस्तेमाल के बाद वह खाने योग्य नहीं बचता। उसे इस्तेमाल न करें।
10. खाने के बाद टहलना
आम भारतीय घरों में खाना खाने के बाद ईवनिंग वॉक पर जाने की आदत आम है। डॉक्टरों के मुताबिक, कोई भी एक्सरसाइज, वॉकिंग, जॉगिंग खाने से पहले करना ही बेहतर है। खाने के चार घंटे बाद तक ऐसा नहीं करना चाहिए।
एक्सर्पट्स पैनल
डॉ. समीर श्रीवास्तव, डायरेक्टर (काडिर्यॉलजी), फोटिर्स एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट
डॉ. आर. एन. कालरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, कालरा हॉस्पिटल
डॉ. एल. के झा, इंदप्रस्थ अपोलो हॉस्टिल
डॉ. ऋषि गुप्ता, एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज
फेसबुक पर Like करने के लिए यहां क्लिक करें
ट्विटर पर Follow करने के लिए यहां क्लिक करें
खुद संभालें सेहत
अगर वजन नॉर्मल है, कमर का घेरा महिलाओं में 32 इंच और पुरुषों में 36 इंच या इससे कम है, बीएमआई 23 तक हो, सिगरेट और अल्कोहल नहीं लेते हों, खानपान ठीक हो, तनाव कम से कम हो और रेग्युलर एक्सरसाइज करते हों तो आपको दिल की बीमारी होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
अचानक दर्द उठे तो...
अगर छाती में अचानक दर्द हो, पसीना आए और घबराहट हो तो हार्ट अटैक का दर्द हो सकता है। हालांकि कई बार गैस दर्द में भी यही लक्षण होते हैं। सबसे पहले मरीज के कपड़े ढीले कर दें। उसे ज्यादा चलाएं-फिराएं नहीं। खुद धीरज न खोएं। अगर पहले से दिल के मरीज हैं तो एक गोली सॉरबिट्रेट (5 मिग्रा.) की दें। एस्पिरिन (ब्रैंड नेम डिस्प्रन आदि) भी ले सकते हैं। 300 मिग्रा एस्पिरिन की गोली चबा लेने से जान जाने का जोखिम नहीं रहता। अगर नहीं जानते कि दिल का दर्द है या कुछ और, तो भी ये गोली दे सकते हैं। अल्सर है तो एस्पिरिन न दें, फौरन डॉक्टर के पास जाएं।
दिल की बीमारी और गैस
सीने में दर्द होने पर अक्सर यह कन्फ़्यूज़न रहता है कि इसके पीछे गैस जिम्मेदार है या कोई दिल की बीमारी हो गई है। एक्सर्पट्स का कहना है कि इस तरह के कन्फ़्यूज़न में कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। ऐसे में अगर किसी को पता है कि उसे हार्ट की बीमारी है तो वह एस्पिरिन की गोली अपने पास रखे। सीने में दर्द होने पर जुबान के नीचे एस्पिरिन की गोली रखें, लेकिन जिन्हें नहीं पता है, वे इसे अपनी मर्जी से बिल्कुल न लें क्योंकि इससे उनका ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है।
सीने में दर्द के मामले में कुछ लक्षणों पर गौर करें, मसलन अगर एग्जर्शन की वजह से दर्द हो रहा है तो इसके दिल से संबंधित होने के चांस ज्यादा हैं। आराम करते समय होने वाला सीने का दर्द जो कुछ सेकंड में गायब हो जाता है, वह एसिडिक हो सकता है, लेकिन यह ध्यान रखें कि आराम के समय होने वाला सीने का दर्द भी अगर जबड़े और बायीं बांह तक पहुंच रहा है तो यह हार्ट से संबंधित है। लक्षणों को लेकर जरा सा भी कन्फ़्यूज़न हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और ईसीजी टेस्ट कराकर सही वजह का पता लगाएं।
सेक्सुअल लाइफ पर असर
दिल की बीमारी से पीडि़त लोगों के दिमाग में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या अब वह पहले की तरह अपने जीवनसाथी के साथ अंतरंग संबंध बना सकेंगे। एक्सर्पट्स का मानना है कि सावधानी न बरतने पर ऐसा करना जानलेवा भी हो सकता है। इसके कई उदाहरण सामने आए हैं। अगर व्यक्ति को पहले से दिल की बीमारी है और उसका इलाज नहीं हुआ है, तो बेहतर है कि वह संबंध बनाने से बचे।
अगर बीमारी का इलाज हो चुका है तो वह सामान्य जिंदगी जी सकता है, लेकिन इससे पहले यह जरूर देख लें कि आप ऐसा करने के लिए फिट हैं या नहीं। इसके लिए एक ट्रेडमिल टेस्ट होता है। अगर कोई 5 मिनट से अधिक समय ट्रेडमिल टेस्ट बिना सांस उखड़े या बिना दर्द के कर सकता है तो वह फिट है। मगर ऐसे लोगों को वायग्रा जैसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए, खासतौर से तब जब वे नाइट्रेट की कैटिगरी की कोई दवा ले रहे हों क्योंकि सिल्डेनालिल कैटिगरी की दवा लेने से दिल के कई मरीजों की सेक्स करते वक्त अचानक हुए हार्ट अटैक से मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह लें।
हार्ट अटैक आने या हार्ट संबंधी बीमारी के इलाज के बाद पहले दो हफ्ते तक सेक्स करने से परहेज बताया जाता है। इसके बाद ट्रेडमिल टेस्ट पास करने वाले को सामान्य ऐक्टिविटी की इजाजत दी जाती है। इसके बाद भी सेक्स के दौरान अगर सीने में दर्द या प्रेशर महसूस हो, थकान, बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, पल्स तेज होने या सिर चकराने जैसे लक्षण दिखें तो समझ जाएं कि आपके दिल को कठिनाई हो रही है। अपने डॉक्टर से सलाह लें।
No comments:
Post a Comment