दिल को रखें दुरुस्त
दिल की बीमारियों का बढ़ता ग्राफ हर किसी की धड़कनों को तेज कर रहा है। यह अच्छी
बात है कि बीमारी को लेकर काफी हद तक जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में इस जागरूकता का पूरा फायदा नहीं मिल
पाता। दिल की सेहत से जुड़ी कुछ बेसिक बातें, उनसे संबंधित भ्रम और बाकी जानकारी दे
रही हैं नीतू सिंह:
खुद जानें दिल का हाल
अगर आप रोजाना 3 से 4 किलोमीटर तेज
कदमों से चल सकते हैं और ऐसा करते हुए आपकी सांस नहीं उखड़ती या सीने में दर्द नहीं होता तो मान सकते हैं कि व्यावहारिक कामों के लिए आपका दिल पूरी तरह स्वस्थ है। यह फ़ॉर्म्युला उन लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता जिन्हें डायबीटीज जैसी समस्या है, क्योंकि उन्हें साइलेंट इस्कीमिया भी हो सकता है।
अगर किसी को दिल की बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं तो मानकर चलें कि 70 पसेंर्ट समस्या हो चुकी है। इस स्थिति से बचने के लिए अपना रिस्क प्रोफाइल जानना और उसके आधार पर कुछ सामान्य टेस्ट कराते रहना जरूरी है।
खुद जानें दिल का हाल
अगर आप रोजाना 3 से 4 किलोमीटर तेज
कदमों से चल सकते हैं और ऐसा करते हुए आपकी सांस नहीं उखड़ती या सीने में दर्द नहीं होता तो मान सकते हैं कि व्यावहारिक कामों के लिए आपका दिल पूरी तरह स्वस्थ है। यह फ़ॉर्म्युला उन लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता जिन्हें डायबीटीज जैसी समस्या है, क्योंकि उन्हें साइलेंट इस्कीमिया भी हो सकता है।
अगर किसी को दिल की बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं तो मानकर चलें कि 70 पसेंर्ट समस्या हो चुकी है। इस स्थिति से बचने के लिए अपना रिस्क प्रोफाइल जानना और उसके आधार पर कुछ सामान्य टेस्ट कराते रहना जरूरी है।
इसे आप 2 उदाहरणों से समझ सकते हैं:
18 साल का सोहम रेग्युलर एक्सरसाइज करता है। पढ़ाई से लेकर खेलकूद के जरिये पूरे दिन ऐक्टिव रहता है। दिल की बीमारी या इसके लिए जिम्मेदार हाई ब्लड प्रेशर, हाई कॉलेस्ट्रॉल, डायबीटीज जैसी किसी समस्या का पारिवारिक इतिहास नहीं है। उसकी खानपान की आदत ठीक है। उसे दिल की बीमारी होने का चांस कम है। ऐसे में सोहम को कोई टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।
55 साल के राम सिंह धूम्रपान करते हैं, उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। वह कभी-कभार ही एक्सरसाइज कर पाते हैं और दिल की बीमारी का उनका पारिवारिक इतिहास भी है। ऐसे में राम सिंह को दिल की बीमारी होने का खतरा काफी ज्यादा है। उन्हें रेग्युलर अपने टेस्ट कराने चाहिए।
टेस्ट: कौन-से और कब कराएं
1. कॉलेस्ट्रॉल
अगर रिस्क फैक्टर (फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग, मोटापा आदि) नहीं है तो 30 साल की उम्र के बाद कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट कराएं। अगर सब कुछ नॉर्मल निकलता है तो भी हर तीन साल में एक बार टेस्ट कराएं। 40 साल के बाद हर साल टेस्ट कराएं।
अगर रिस्क फैक्टर है तो 25 साल की उम्र के बाद ही हर साल टेस्ट कराएं। कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण या बीमारी होने पर हर छह महीने या जब डॉक्टर कहें, टेस्ट करवाना चाहिए।
कॉलेस्ट्रॉल के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं। इसमें एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लाइसराइड और इनकी रेश्यो की जांच होती है।
पहले रेस्टिंग ईसीजी कराएं। अगर उसमें सब ठीक है तो टेडमिल टेस्ट (टीएमटी) कराएं। अगर कुछ गड़बड़ी निकलती है तो इको अल्ट्रासाउंड या एंजियोग्राफी करवानी चाहिए। एंजियोग्राफी टेस्ट से धमनियों की स्थिति और ब्लॉकेज का पता चल जाता है।
सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी टेस्ट स्कैन दो मिनट का होता है। इस पर 6-7 हजार रुपये तक खर्च आता है।
नोट: लिपिड प्रोफाइल के अलावा बाकी सभी टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर ही कराएं।
2. ब्लड प्रेशर
रिस्क फैक्टर वाले लोग बीपी की जांच 25 साल की उम्र से शुरू कराएं।
सामान्य लोग 35 साल की उम्र से यह टेस्ट कराएं। अगर कुछ गड़बड़ी नजर आती है तो हर दो हफ्ते में बीपी की जांच कराएं। सामान्य होने के बाद एक-दो महीने में जांच करा लें।
बीपी की जांच के लिए ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, टीएमटी, इको कार्डयाग्रफी आदि टेस्ट कराए जाते हैं। जहां रिस्क फैक्टर ज्यादा होते हैं, वहां कोरोनरी स्क्रीनिंग टेस्ट कराया जाता है।
अगर बीपी 120 (ऊपर वाला) और 80 (नीचे वाला) रहता है तो ठीक है। बुजुर्गों में 110-70 नॉर्मल माना जाता है। 120-140 से 81-89 तक बीपी प्रीहाइपरटेंशन कहलाता है। यह हर पांचवें आदमी को होती है। इसके लिए डॉक्टर शुरू में नॉन मेडिकल तरीके आजमाने को कहते हैं जैसे कि वजन कम करना, लंबी वॉक करना, नमक कम खाना, एक्सरसाइज करना आदि।
हाई बीपी के साथ कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा हो तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इन मरीजों को शुगर होने की आशंका काफी ज्यादा होती है क्योंकि अक्सर लोगों को ये बीमारी लाइफस्टाइल गड़बड़ होने से होती हैं।
आराम की हालत में नीचे वाला बीपी बार-बार 90 से ऊपर रहे तो नुकसानदायक है। हालांकि अगर लक्षण सही हैं तो नीचे वाला 50 तक भी ठीक है।
बीपी का बहुत कम होना भी सही नहीं है। अगर ऊपर वाला 80 तक और नीचे वाला 40-45 तक पहुंच जाए तो खतरनाक होता है। ऐसे में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
जिन्हें बीपी की समस्या है, उनका बीपी अगर 10 पॉइंट ज्यादा हो तो भी नॉर्मल माना जाता है।
एक्सरसाइज के दौरान बीपी बढ़ता है। इससे घबराना नहीं चाहिए।
3. शुगर
अगर रिस्क फैक्टर नहीं हैं और सेहत ठीक है तो 30 साल की उम्र में साल में पहली बार ब्लड शुगर टेस्ट करा लें। सब कुछ सामान्य आता है तो आगे तीन साल में एक बार करा सकते हैं। 40 साल के बाद हर साल टेस्ट कराना चाहिए।
खाली पेट यानी फास्टिंग शुगर 100 तक और खाना खाने के बाद यानी पीपी 140 तक होना चाहिए। शुगर लेवल थोड़ा भी ज्यादा आता है या फैमिली हिस्ट्री है तो ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट जरूर कराएं। प्री डायबेटिक (फास्टिंग : 101-140 और पीपी 141-180 तक) और फैमिली हिस्ट्री वाले हर तीन महीने में जांच कराएं।
जो लोग इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें रोज या हफ्ते में कम-से-कम तीन बार खून की जांच करानी चाहिए। जो लोग डायबीटीज को कंट्रोल में रखने के लिए गोलियां खाते हैं, उन्हें हफ्ते में एक बार शुगर की जांच जरूर करानी चाहिए।
शुगर टेस्ट खाली पेट और खाने के बाद दोनों कराना चाहिए। जिन्हें शुगर नहीं है, वे रैंडम भी करा सकते हैं लेकिन सबसे बेहतर है ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन टेस्ट, जो पिछले 3 महीनों के शुगर लेवल की जानकारी देता है। इसे एवरेज शुगर टेस्ट भी कहा जाता है और काफी भरोसेमंद टेस्ट माना जाता है।
दिल के करीबी 4 यार
1. खानपान
चाहे दिल की बीमारी हो या न हो, हर किसी को संतुलित आहार लेना चाहिए। संतुलित आहार का मतलब है, जिसमें काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन आदि की पर्याप्त मात्रा हो। वनस्पति घी या देसी घी से खाना बनाने से बचें। टोंड मिल्क का इस्तेमाल करें। बादाम और अखरोट जैसी मेवाएं, गुड कॉलेस्ट्रॉल के सबसे अच्छे स्त्रोत हैं।
तेलों का सही बैलेंस जरूरी है। एक दिन में कुल तीन चम्मच तेल काफी है। तेल बदल-बदल कर और कॉम्बिनेशन में खाएं। ऑलिव ऑयल या सरसों का तेल ज्यादा यूज करें। इससे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है, लेकिन इसे ज्यादा गरम न करें।
फैट दो तरह का होता है। एक हैवी फैट, जो किसी भी तापमान पर जम जाता है जैसे घी, मक्खन, मलाई, चॉकलेट, मटन आदि। दूसरा होता है लिक्विड फैट, जो जमता नहीं है और जिसकी थोड़ी मात्रा शरीर के लिए जरूरी होती है। इसमें सरसों का तेल या कैनोला ऑयल आदि शामिल हैं। कैनोला सरसों की प्रजाति का होता है, लेकिन इसमें सरसों के तेल की तरह कड़वेपन वाली महक नहीं होती। एक्सर्पट्स के मुताबिक कैनोला ऑयल और ऑलिव ऑयल सेहत के लिए बेस्ट होते हैं।
ऐसी चीजें खाएं, जिनमें फाइबर खूब हो, जैसे गेहूं, ज्वार, बाजरा, जई, ईसबगोल आदि। दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स और दालों के फाइबर से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। आटे में चोकर मिलाकर इस्तेमाल करें। गेहूं, बाजरा आदि अनाजों की मिक्स रोटी खाएं।
हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी के बीज आदि खाएं। इनमें फॉलिक एसिड होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल लेवल घटाता है।
सरसों तेल, बीन्स, बादाम, अखरोट, फिश लीवर ऑयल, सामन मछली, फ्लैक्स सीड्स (अलसी के बीज) खाने चाहिए। इनमें काफी ओमेगा-थ्री होता है, जो दिल के लिए अच्छा है।
मेथी, लहसुन, प्याज, हल्दी, सोयाबीन आदि खाएं। इनसे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है।
एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए रोजाना पांच-छह बादाम खाएं। अखरोट व पिस्ता भी फायदेमंद हैं।
स्किफ्ड, फैट फ्री दूध या सोया मिल्क लें। अंडे का सफेद हिस्सा खाएं। पीला निकाल लें।
कॉलेस्ट्रॉल लिवर के डिस्ऑर्डर से बढ़ता है। लिवर साफ करने के लिए एलोवेरा जूस, आंवला जूस और वेजिटेबल जूस लें। इन्हें बराबर मात्रा में मिलाकर रोज एक गिलास और कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा हो तो दो गिलास भी पी सकते हैं।
परहेज करें
- कॉलेस्ट्रॉल सिर्फ अंडे के पीले हिस्से, रेड मीट और दूध (मलाई) में ही पाया जाता है। इनसे बचें।
- एलडीएल या बैड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा है तो चीनी, चावल और मैदा न खाएं।
- सैचुरेडेटिड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल, मियोनिज) न लें।
- तला-भुना खाना न खाएं। भाप में पकाकर खाना खाएं। बिस्कुट, मट्ठी आदि में काफी ट्रांसफैट होता है, जो सीधा लिवर पर असर करता है। उससे बचें।
- प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम, खोए की मिठाई, भुजिया आदि से परहेज करें।
- फुल क्रीम दूध और उससे बना पनीर या खोया नहीं खाएं।
- नारियल और नारियल के दूध से परहेज करें। इसमें तेल होता है।
- उड़द दाल, नमक और चावल ज्यादा न खाएं। कॉफी भी ज्यादा न पीएं।
2. एक्सरसाइज
अगर सेहतमंद हैं तो...
दिल की बीमारी से बचने के लिए रोजाना कम-से-कम आधा घंटा कार्डियो एक्सरसाइज करना जरूरी है। इससे वजन कम होता है, डायबीटीज का खतरा कम होता है, फुतीर् बढ़ती है, बीपी कम हो जाता है और दिल की बीमारी की आशंका 25 फीसदी कम हो जाती है।
कार्डियो एक्सरसाइज में तेज वॉक, जॉगिंग, साइकलिंग, स्विमिंग, एरोबिक्स, डांस आदि शामिल हैं। अगर तरीके से करें तो ब्रिस्क यानी तेज वॉक जॉगिंग यानी हल्की दौड़ से भी बेहतर साबित होती है, क्योंकि जॉगिंग में जल्दी थक जाते हैं और घुटनों की समस्या होने का खतरा होता है। वॉक और ब्रिस्क वॉक में फर्क यह है कि वॉक में हम 1 मिनट में आम तौर पर 40-50 कदम चलते हैं जबकि ब्रिस्क वॉक में 1 मिनट में लगभग 80 कदम चलते हैं। जॉगिंग में 160 कदम चलते हैं।
एक्सरसाइज शुरू करने से पहले 5 मिनट वॉर्म-अप यानी हाथ-पांव हिलाएं, हल्की जंपिंग आदि करें और खत्म करने के बाद 5 मिनट कूल डाउन यानी आराम से बैठ कर लंबी सांसें लें और छोड़ें।
नोट: एक्सराइज किसी भी वक्त कर सकते हैं लेकिन पूरा खाना खाने के दो घंटे बाद तक न करें। खाना खाने के बाद वॉक पर निकलने का भी दिल को कोई फायदा नहीं है। इसके लिए खाली पेट तेज वॉक करना जरूरी है। अगर एक बार में पूरा वक्त नहीं मिलता तो एक्सरसाइज या वॉक दिन में दो बार में 15-15 मिनट के लिए भी कर सकते हैं।
योगासन
- रोजाना कम-से-कम 10 बार सूर्य नमस्कार करें।
- सिर से पैर तक की मूवमेंट के अलावा पादहस्तासन, त्रिकोणासन, शशांकासन, वक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, मेरुदंडासन और उत्तानपादासन करें। ये दिल के लिए अच्छे हैं।
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