Sunday, 22 September 2013

बुखार...... part 2

प्लेटलेट्स की भूमिका
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तंदुरुस्त आदमी के शरीर में डेढ़ से लेकर 4 लाख तक प्लेटलेट्स होते हैं।
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प्लेटलेट्स रक्त का वह हिस्सा है जो बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करता है।

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अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि जिसे डेंगू हो, उसकी प्लेटलेट्स नीचे ही जाएं और प्लेटलेट्स कम होने का मतलब भी सिर्फ डेंगू नहीं है। प्लेटलेट्स कम होने की कई दूसरी वजह भी हो सकती हैं। कई बार मलेरिया में भी प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं।
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प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स

जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लेटलेट्स कम कर देता है, जिससे बॉडी में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। अगर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं, मसलन सुबह 1 लाख थे और दोपहर तक 50-60 हजार हो गए तो डॉक्टर प्लेटलेट्स का इंतजाम करने लगते हैं ताकि जरूरत पड़ते ही मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाए जा सकें।
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जहां तक प्लेटलेट्स के लिए किए जाने वाले टेस्ट का सवाल है तो यह बेहद आसान सा टेस्ट है जो सीबीसी के जरिए ही हो जाता है। बहुत महंगा भी नहीं है। लैब के हिसाब से आमतौर पर 200 या 250 रुपए में हो जाता है और उसी दिन रिपोर्ट मिल जाती है।
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अगर प्लेटलेट्स गिर रही हैं तो कितने समय अंतराल पर उनका टेस्ट कराना चाहिए, इसका फैसला मरीज की कंडिशन देखकर डॉक्टर करते हैं। वैसे गंभीर स्थिति में डॉक्टर दिन में 2 बार भी प्लेटलेट्स काउंट चेक करते हैं।
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जो भी व्यक्ति सामान्य ब्लड डोनेशन कर सकता है, वह प्लेटलेट्स डोनेट करने के योग्य भी है। इसके लिए अलग से कोई कंडिशन नहीं हैं।
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प्लेटलेट्स बैग्स दो तरह के होते हैं सिंगल डोनर और रैंडम डोनर। ब्लड से प्लेटलेट्स को अलग करने का खर्च प्रति बैग सिंगर डोनर के मामले में 6 से 7 हजार रुपए के बीच आता है।

2.
मलेरिया
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प्लाज्मोडियम' नाम के पैरासाइट से होने वाली बीमारी है मलेरिया। यह मादा 'एनोफिलीज' मच्छर के काटने से होता है जोकि गंदे पानी में पनपते हैं। ये मच्छर आमतौर पर सूर्यास्त के बाद काटते हैं।
किस सीजन में फैलता है: जुलाई से नवंबर के बीच में ज्यादा होता है।

लक्षण: तेज बुखार, सिर दर्द, शरीर दर्द, उलटी, जी मिचलाना, कमजोरी। इसमें आमतौर पर एक दिन छोड़कर बुखार आता है और मरीज को बुखार के साथ कंपकंपी (ठंड) भी लगती है।
एलोपैथी: chloroquine, primaquine, mefloquine (इन दवाइयों के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, इसलिए इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के न लें)। इसमें ऐंटि-बायोटिक नहीं, ऐंटि-मलेरियल दवा दी जाती है।
होम्योपैथी: chininum sulph 3x, cinchona 30, malaria officinalis 30

डोज: 30 नंबर की 5-5 गोली दिन में चार बार लें।
आयुर्वेद: महासुदर्शन चूर्ण और मृत्युजंय रस (गोली)
डोज: आधा चम्मच चूर्ण और 1 गोली, सुबह-शाम गरम पानी के साथ, 5 दिन तक लें।
घरेलू नुस्खा : गिलोय की डंडी (चार इंच की), 20 ग्राम गुड़ , एक बड़ी इलायची और एक लौंग को उबालकर उसका काढ़ा बनाकर 5 दिन तक पीएं।
डोज: दिन में दो बार। सुबह नाश्ते के बाद और रात में डिनर से पहले लें। यह इम्युनिटी भी बढ़ाता है।

3.
वायरल
किसी भी वायरस की वजह से होने वाला बुखार वायरल होता है। वायरल होने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें से मुख्य कारण सीवर के पानी का, पीने के पानी में मिलना (जोकि अक्सर बारिश के दिनों में हो जाता है) और इन्फेक्शन वाले आदमी और उसके संपर्क में आई चीजों को छूना।

टेस्ट
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फीसदी मामलों में किसी टेस्ट की जरूरत नहीं होती। बुखार कम/खत्म नहीं होता तो डॉक्टर सीबीसी यानी कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट की मदद से जांचते हैं कि ब्लड में कोई इन्फेक्शन तो नहीं है। सीबीसी कम होंगे तो वायरल होगा और बढ़े हुए होंगे तो बैक्टीरियल फीवर होगा। सीबीसी से स्थिति साफ न हो या किसी खास वायरस का खतरा नजर आता है तो डॉक्टर वायरल ऐंटिजन टेस्ट (वीएटी) या पॉलीमरेज चेन रिएक्शन टेस्ट (पीसीआर) कराने की सलाह देते हैं।

कब फैलता है
यह आमतौर पर मौसम बदलने पर होता है लेकिन मॉनसून में लोग इसके ज्यादा शिकार होते हैं।

कितने दिन रहता है
3
से 4 दिनों तक

लक्षण
बुखार, सिर दर्द, नाक बहना, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द।

इलाज
एलोपैथी: इसमें ऐंटिबायोटिक नहीं दी जाती। तापमान 102 डिग्री तक रहता है तो हर 6 घंटे में पैरासेटामॉल की 1 गोली मरीज को दे सकते हैं। बच्चों को हर 4 घंटे में दवा दे सकते हैं। बच्चों को 10 मिली प्रति किलो वजन के अनुसार पैरासेटामॉल सिरप दे सकते हैं। दो-तीन दिन तक बुखार ठीक न हो तो डॉक्टर के पास जाएं।

होम्योपैथ: gelsemium 30, Arsenicum Album30 30 नंबर की 5-5 गोली दिन में चार बार लें। आप इन्हें तीन दिन तक ले सकते हैं।
आयुर्वेदिक: त्रिभुवन कीर्ति और आनंद भैरव की 1-1 गोली सुबह-शाम गरम पानी के साथ लें।

4.
टायफाइड
इसे एंट्रिक फीवर और मियादी बुखार भी कहते हैं। यह सेल्मोनिया नाम के बैक्टीरिया से होता है, जिससे आंत में जख्म (अल्सर) हो जाता है, जो बुखार की वजह बनता है।

कैसे फैलता है
पीने के पानी में सीवर का पानी मिलना इसके होने का सबसे बड़ा कारण है।

कब होता है
वैसे तो यह कभी भी हो सकता है लेकिन बरसात के मौसम में यह सबसे ज्यादा होता है क्योंकि ज्यादातर इसी समय सीवेज सिस्टम खराब होता है।
तेज बुखार, सिर दर्द, शरीर दर्द, उलटी, जी मिचलाना। हालांकि यह बुखार कंपकंपी के साथ नहीं आता लेकिन इस बार मौनसून के दिनों देखा गया है कि यह कंपकंपी के साथ आ रहा है।
एलोपैथी: olfoxacin, levofloxacin, pyrogenium इसमें ऐंटिबायोटिक दवा दी जाती है।
होम्योपैथी: Baptisia 30, Bryonia, pyrogenium 30
डोज: 30 नंबर की 5-5 गोली दिन में चार बार ले। (सभी दवाएं टेस्ट कंफर्म होने के बाद ही लें)
आयुर्वेद: प्रवाल पिष्टी 250 द्वद्द, मोती पिष्टी 250 द्वद्द और सिद्ध मकरध्वज 125 द्वद्द तीनों की एक-एक गोली को पीसकर मिला लें, फिर शहद के साथ दिन में दो बार, सुबह-शाम 15 दिन तक लें।

जरूर ध्यान रखें
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बुखार है (खासकर डेंगू के सीजन में) तो एस्प्रिन (Asprin) बिल्कुल न लें। यह मार्केट में इकोस्प्रिन (Ecosprin) आदि ब्रैंड नेम से मिलती है। ब्रूफेन (Brufen), कॉम्बिफ्लेम (combiflame) आदि एनॉलजेसिक से भी परहेज करें क्योंकि अगर डेंगू है तो इन दवाओं से प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं और शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। किसी भी तरह के बुखार में सबसे सेफ पैरासेटामॉल लेना है।
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झोलाछाप डॉक्टरों के पास न जाएं। अक्सर ऐसे डॉक्टर बिना सोचे-समझे कोई भी दवाई दे देते हैं। डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) इंजेक्शन और टैब्लेट तो बिल्कुल न लें। अक्सर झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को इसका इंजेक्शन और टैब्लेट दे देते हैं, जिससे नुकसान हो जाता है।

बुखार में कॉमन गलतियां
1.
कई बार लोग खुद और कभी-कभी डॉक्टर भी बुखार में फौरन ऐंटि-बायोटिक देने लगते हैं। सच यह है कि टायफायड के अलावा आमतौर पर किसी और बुखार में ऐंटि-बायोटिक की जरूरत नहीं होती।
2.
ज्यादा ऐंटि-बायोटिक लेने से शरीर इसके प्रति इम्यून हो जाता है। ऐसे में जब टायफायड आदि होने पर ऐंटि-बायोटिक की जरूरत होगी तो वह शरीर पर काम नहीं करेगी। ऐंटि-बायोटिक के साइड इफेक्ट भी होते हैं। इससे शरीर के गुड बैक्टीरिया मारे जाते हैं।
3.
डेंगू में अक्सर तीमारदार या डॉक्टर प्लेटलेट्स चढ़ाने की जल्दी करने लगते हैं। यह सही नहीं है। इससे उलटे रिकवरी में वक्त लग जाता है। जब तक प्लेटलेट्स 20 हजार या उससे कम न हों, प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती।
4.
कई बार परिजन मरीज से खुद को चादर से ढककर रखने को कहते हैं, ताकि पसीना आकर बुखार उतर जाए। इसकी बजाय उसे खुली और ताजा हवा लगने दें। उसके शरीर पर सादा पानी की पट्टियां रखें।
5.
बुखार में मरीज या उसके परिजन पैनिक करने लगते हैं और आनन-फानन में तमाम टेस्ट (मलेरिया, डेंगू, टायफायड आदि के लिए) कराने लगते हैं। दो दिन इंतजार करने के बाद डॉक्टर के कहे मुताबिक टेस्ट कराना बेहतर है।

मच्छरों से बचाव के तरीके
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लहसुन का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। इसकी गंध से मच्छर दूर भागते हैं।
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लैवेंडर ऑइल को त्वचा पर लगाने से मच्छर दूर रहते हैं।
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नीम का तेल भी मच्छर भगाने में बड़ा उपयोगी है। सोने से पहले थोड़ा सा नीम का तेल शरीर पर लगा लेने से मच्छर नहीं काटते।
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घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी नालियों को साफ करें।
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अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑइल डालें।
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रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें। घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें।
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डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
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मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।
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मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि इस्तेमाल करें। गुग्गुल के धुएं से मच्छर भगाना अच्छा देसी उपाय है।
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घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवा का छिड़काव जरूर करें। यह दवाई फोटो-फ्रेम्स, पर्दों, कैलेंडरों आदि के पीछे और घर के स्टोर-रूम और सभी कोनों में जरूर छिड़कें। दवाई छिड़कते वक्त अपने मुंह और नाक पर कोई कपड़ा जरूर बांधें। साथ ही, खाने-पीने की सभी चीजों को ढककर रखें।
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पीने के पानी में क्लोरीन की गोली मिलाएं और पानी उबालकर पीएं।
नोट : यहां जो भी मेडिकल सलाह दी गई है, वह सिर्फ पाठकों की जानकारी बढ़ाने के लिए ही दी गई है जिससे इलाज के बारे में वे सही वक्त पर सही फैसला कर सकें। कोई भी दवा लेनी हो या टेस्ट कराना हो, डॉक्टर से पूछ लें। आखिरी फैसला अपने डॉक्टर पर छोड़ दें।

पाठकों से
बुखार से जुड़ा अगर अब भी आपका कोई सवाल रह गया है तो आप अपना सवाल हमें हिंदी या अंग्रेजी में sundaynbt@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स से पूछकर आपके कुछ चुनिंदा सवालों के जवाब अगले संडे छापेंगे।

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